Wo Mausam Ke Bahane Se | Goonj Chand | Poetry - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Wo Mausam Ke Bahane Se | Goonj Chand | Poetry

Wo Mausam Ke Bahane Se | Goonj Chand | Poetry
Wo Mausam Ke Bahane Se | Goonj Chand | Poetry

इस कविता के बारे में :

इस काव्य 'वो मौसम के बहाने से' को Goonj Waves के लेबल के तहत 'गूँज चाँद' ने लिखा और प्रस्तुत किया है।

*****

बारिश हो रही है में खिड़की 

से देख रही हूँ

और ये पैगाम जो तुम 

मौसम के बहाने से

मुझे भेज रहे हो न ये तो में कितने 

सालो से तुम्हे भेज रही हूँ

***

आज में तुम्हरे बिना ही इस 

बारिश में भीग रही हूँ

और जबाब मिल जाये तुम्हे जल्द 

से जल्द इस सवाल का

इसलिए इस बारिश को तुम्हारे 

शहर बापस भेज रही हूँ 

***

और समझ जाओ इस बार तुम 

मेरे जज़्बातो को शायद

इसी उम्मीद में एक अरसे से 

ज़िन्दगी बसर कर रही हूँ

आज में तुम्हरे बिना ही इस 

बारिश में भीग रही हूँ

***

और इसबार तुम अपना जबाब 

किसी और तरीके से दोगे मुझे

इसीलिए सुबह से अपना पुराना 

नंबर ढूंढ रही हूँ

और कॉल करने की हिम्मत तो अब 

भी नहीं कर पाओगे तुम

***

इसीलिए पुराने नंबर पे व्हाट्सप्प 

भी ऑन कर रही हूँ

आज में तुम्हरे बिना ही इस 

बारिश में भीग रही हूँ

***

हा पता है ये सब मेरे दिमाग 

के ख़याली पुलाव है

में तो बस बेवजह खुश 

होना शीख रही हूँ

और मोहब्बत तो आज भी शिद्दत 

से करती हूँ तुझसे

***

इसलिए तो बारिश का बहाना बना 

शायरी में सब कह रही हूँ

आज में तुम्हरे बिना ही इस 

बारिश में भीग रही हूँ

***

बारिश हो रही है में खिड़की 

से देख रही हूँ

और ये पैगाम जो तुम मौसम 

के बहाने से

***

मुझे भेज रहे हो न ये तो में कितने 

सालो से तुम्हे भेज रही हूँ

आज में तुम्हरे बिना ही इस 

बारिश में भीग रही हूँ

*****

सुनिए इस कविता का ऑडियो वर्शन


( Use UC Browser For Better Audio Experience )

*****


... Thank You ...



( Disclaimer: The Orignal Copyright Of this Content Is Belong to the Respective Writer )
                                                                                                                                                                                                              

Post a Comment

0 Comments