Uska Ab Mujhse Man Bhar Gya Hai | Poem By Kanha Kamboj | The Realistic Dice - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Uska Ab Mujhse Man Bhar Gya Hai | Poem By Kanha Kamboj | The Realistic Dice

Uska Ab Mujhse Man Bhar Gya Hai | Poem By Kanha Kamboj | The Realistic Dice
Uska Ab Mujhse Man Bhar Gya Hai | Poem By Kanha Kamboj | The Realistic Dice

इस कविता के बारे में :

इस काव्य 'उसका अब मुझसे मन भर गया है' को The Realistic Dice के लेबल के तहत कान्हा कम्बोज ने लिखा और प्रस्तुत किया है।

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ये कैसा ख़्वाब में फन भर गया है

शायद पुराना कोई जख्म भर गया है

आपके आँसू क्यों नहीं रुक रहे

क्या आँखों में आपकी गगन भर गया है

मन भर कर चूमता था वो हमें कभी

अब उसका मुझ से भी मन भर गया है

***

इस तरह ढाए हैं उसने सितम 

मुझ पर ज़ख्म से दिल ही नहीं पूरा 

बदन भर गया है

अपनी हकीकत में ये एक कहानी 

करनी पड़ी उसके जैसी ही मुझे अपनी 

जुबानी करनी पड़ी कर तो सकता था 

***

बातें इधर उधर की बहुत

मगर कुछ लोगों में बातें हमें 

खानदानी करनी पड़ी

अपनी आँखों से देखा था मंजर 

बेवफाई का गैर से सुना तो फिजूल 

हैरानी करनी पड़ी

पहले उससे मोहब्बत रूह तलक 

की मैंने फिर हरकतें मुझे अपने 

जिस्मानी करनी पड़ी

***

एक छाप रह गई थी उसकी 

मेरे जिस्म पर अकेले में मिली तो वापिस 

निशानी करनी पड़ी हाथ में ताश की 

गड्डी ले कान्हा को जोकर समझती 

रही फिर पत्ते बदल हमें बेईमानी 

करनी पड़ी गैर से हंसकर बात कर 

खूब जलाया हमको हमें भी फिर किसी 

का हाथ थाम शैतानी करनी पड़ी

***

पलकों ने बहुत समझाया, 

मगर ये आँख नहीं मानी

दिन तो हंसकर गुज़ारा हमने, 

मगर ये रात नहीं मानी

बिस्तर की सिलवट दे रही थी 

गवाही गैर की

हमने करवट बदल ली, 

मगर ये बात नहीं मानी

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सुनिए इस कविता का ऑडियो वर्शन


( Use UC Browser For Better Audio Experience )

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... Thank You ...



( Disclaimer: The Orignal Copyright Of this Content Is Belong to the Respective Writer )
                                                                                                                                                                                                              

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