Mohabbat Kaat Kar Ibaadat Likha Hai | The Social House Poetry - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Mohabbat Kaat Kar Ibaadat Likha Hai | The Social House Poetry

Mohabbat Kaat Kar Ibaadat Likha Hai | The Social House Poetry
Mohabbat Kaat Kar Ibaadat Likha Hai | The Social House Poetry

इस कविता के बारे में :

द सोशल हाउस के लिए सुंदर कविता 'मोहब्बत काट कर इबादत लिखा है' को शुभम टाक द्वारा प्रस्तुत किया गया है और यह भी उनके द्वारा लिखा गया है जो बहुत सुंदर और आनंदमय है।

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भले ही चार कदम पर साथ मेरे चल लेना 

इतनी भी जाकिर खान न बनना, 

ज़रा सा तो पिघल लेना 

एक मौका तो देकर देखो हमें 

फिर अगर मोहब्बत न हुई 

तो नाम बदल देना

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मोहब्बत काट कर इबादत लिखा है 

टोक देना अगर कुछ गलत लिखा है 

मैं शायर हूं! शायरों की ज़ुबान जानता हूं

इसलिए ख्वाबों को भी हकीकत लिखा है 

प्यार मांगा था प्यार के बदले 

जुर्म में हमारे रिश्वत लिखा है 

***

बस नाम लिया था तुम्हारा महफिल में

लोगों ने कहा वाह कितना खूबसूरत लिखा है

बांटे गए धर्म के नाम पर लोग यहां 

पूछने पे सबने मां का नाम भारत लिखा है

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सुनिए इस कविता का ऑडियो वर्शन


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... Thank You ...



( Disclaimer: The Orignal Copyright Of this Content Is Belong to the Respective Writer )
                                                                                                                                                                                                                                                                      

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