Door Hokar Bhi Koi Door Nahi Hota | Goonj Chand | Poetry - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Door Hokar Bhi Koi Door Nahi Hota | Goonj Chand | Poetry


Door Hokar Bhi Koi Door Nahi Hota | Goonj Chand | Poetry
Door Hokar Bhi Koi Door Nahi Hota | Goonj Chand | Poetry


इस कविता के बारे में :

इस काव्य 'दूर होकर भी कोई दूर नहीं होता' को Goonj Waves के लेबल के तहत 'गूँज चाँद' ने लिखा और प्रस्तुत किया है।

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कुछ रिश्तो का कोई मोल नहीं होता 

दूर होकर भी कोई दूर नहीं होता

एहसास ही काफी है एक दूसरे 

में ज़िंदा रहने के लिए 

सिर्फ जिस्मों का पास होना 

ही ज़रूरी नहीं होता

और दूर होकर भी कोई दूर नहीं होता

***

दो लोगो की खामोशियाँ भी बहोत 

कुछ कह देती है कभी कभी 

हर बार लफ़्ज़ों का इस्तेमाल 

करना ज़रूरी नहीं होता

दूर होकर भी कोई दूर नहीं होता

***

खुद को रोक लेती हूँ अक्सर में 

पर ये दिल है की रुकने का नाम नहीं लेता 

और दूर होकर भी कोई दूर नहीं होता

***

जानती हूँ वो मेरा नहीं है 

पर ये जानते हुए भी उसे पाने का 

हौसला मुझसे कम नहीं होता

और दूर होकर भी कोई दूर नहीं होता

***

प्यार तो तेरी आँखों में भी दीखता है मुझे 

पर न जाने कियूं वो तेरे लफ़्ज़ों 

से कभी बयाँ नहीं होता

दूर होकर भी कोई दूर नहीं होता

***

कुछ रिश्तो का कोई मोल नहीं होता 

दूर होकर भी कोई दूर नहीं होता

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सुनिए इस कविता का ऑडियो वर्शन


( Use UC Browser For Better Audio Experience )

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... Thank You ...



( Disclaimer: The Orignal Copyright Of this Content Is Belong to the Respective Writer )
                                                                                                                                                                                                              

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