Nepotism Ki Rassi Ne Aaj Phir Ek Talent Ko Latka Diya | Goonj Chand | Poetry - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Nepotism Ki Rassi Ne Aaj Phir Ek Talent Ko Latka Diya | Goonj Chand | Poetry

Nepotism Ki Rassi Ne Aaj Phir Ek Talent Ko Latka Diya | Goonj Chand | Poetry
Nepotism Ki Rassi Ne Aaj Phir Ek Talent Ko Latka Diya | Goonj Chand | Poetry

इस कविता के बारे में :

इस काव्य 'नेपोटिस्म की रस्सी ने आज फिर एक टैलेंट को लटका दिया' को G Talks के लेबल के तहत 'गूँज चाँद' ने लिखा और प्रस्तुत किया है।

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घुटन में थी एक ज़िन्दगी 

अंधेरो में खो गया था रास्ता 

जब ज़रूरत थी उसे दोस्तों की तो 

किसी ने नहीं रखा कोई वास्ता

सारे दरवाज़े बंद देख उसे 

समझ न आया वो कहा जाये 

वो कहता रह गया हम सुन्न न पाए

***

नेपोटिस्म की रस्सी ने आज फिर 

एक टैलेंट को लटका दिया

और बॉलीवुड के इन ठेकेदारों ने 

उसे मंज़िल से भटका दिया 

उन्हें डर था शायद के ये टैलेंट उनके 

नेपोटिस्म को पीछे न छोड़ जाये

वो कहता रह गया हम सुन्न न पाए

***

सही कहती है कंगना ये 

हत्या है आत्म-हत्या नहीं 

और कल भी वो बोली थी 

आज फिर से है वो बोल रही 

है वक़्त अभी भी सोचो सब के 

कल फिर से कोई शुशांत

शांत न हो जाये 

वो कहता रह गया हम सुन्न न पाए

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सुनिए इस कविता का ऑडियो वर्शन


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... Thank You ...



( Disclaimer: The Orignal Copyright Of this Content Is Belong to the Respective Writer )
                                                                                                                                                                                                              

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