Lord Shri Krishna Quotes In Hindi - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Lord Shri Krishna Quotes In Hindi

Lord Shri Krishna Quotes In Hindi
Lord Shri Krishna Quotes In Hindi

श्री कृष्णा के बारे में:-


कृष्ण हिंदू धर्म में एक प्रमुख देवता हैं। उन्हें भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में पूजा जाता है और अपने आप में सर्वोच्च भगवान के रूप में भी।

वह करुणा, कोमलता, प्रेम के देवता हैं और भारतीय दिव्यताओं में सबसे लोकप्रिय और व्यापक रूप से पूजनीय हैं। कृष्ण जन्माष्टमी पर हिंदुओं द्वारा हर साल कृष्ण जन्माष्टमी को हिंदू कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है, 

जो ग्रेगोरियन कैलेंडर के अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत में आता है। कृष्ण को आमतौर पर हाथ में बांसुरी के साथ चित्रित किया जाता है।

कृष्ण के जीवन के उपाख्यानों और आख्यानों को आम तौर पर कृष्ण लीला के नाम से जाना जाता है। वह महाभारत, भगवत पुराण और भगवद गीता में एक केंद्रीय चरित्र है, और कई हिंदू दार्शनिक, धार्मिक और पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख किया गया है। 

वे उसे विभिन्न दृष्टिकोणों में चित्रित करते हैं: एक ईश्वर-बच्चा, एक मसखरा, एक मॉडल प्रेमी, एक दिव्य नायक, और सार्वभौमिक सर्वोच्च व्यक्ति के रूप में। उनकी आइकनोग्राफी इन किंवदंतियों को दर्शाती है, और उन्हें अपने जीवन के विभिन्न चरणों में दिखाती है, 

जैसे कि एक शिशु खाने वाला मक्खन, बांसुरी बजाने वाला एक युवा लड़का, अपने प्रेमी राधा के साथ एक युवा लड़का या महिला भक्तों से घिरा हुआ, या एक दोस्ताना सारथी परामर्श देने वाला अर्जुन।

कृष्ण के समानार्थी शब्द 1 सहस्राब्दी ईसा पूर्व के साहित्य से पता चला है। कुछ उप-परंपराओं में, कृष्ण को स्वयम भगवान के रूप में पूजा जाता है, और इसे कभी-कभी कृष्णवाद कहा जाता है। ये उप-परंपराएं मध्यकालीन युग भक्ति आंदोलन के संदर्भ में उत्पन्न हुईं। 

कृष्णा-संबंधी साहित्य ने कई प्रदर्शन कलाओं जैसे कि भरतनाट्यम, कथकली, कुचिपुड़ी, ओडिसी और मणिपुरी नृत्य को प्रेरित किया है। वह एक अखिल हिंदू देवता हैं, लेकिन विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में वृंदावन, द्वारका, और गुजरात में जूनागढ़ जैसे कुछ स्थानों पर प्रतिष्ठित हैं; 

ओडिशा में जगन्नाथ पहलू, पश्चिम बंगाल में मायापुर, पंढरपुर, महाराष्ट्र में विठोबा, राजस्थान में नाथद्वारा, कर्नाटक में उडुपी कृष्णा और केरल में गुरुवायूरप्पन में गुरुवायूरप्पन के रूप में। 

1960 के दशक के बाद से, कृष्णा की पूजा पश्चिमी दुनिया और अफ्रीका में भी फैल गई है, जिसका मुख्य कारण इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) के काम के कारण है।

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नर्क के तीन द्वार हैं: वासना, 

क्रोध, और लालच।
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मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है, 

जैसा वो विश्वास करता है वैसा वो बन जाता है।”
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परिवर्तन इस संसार का नियम है, 

कल जो किसी और का था, 

आज वो तुम्हारा हैं एवं कल वो किसी और का होगा।
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जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके 

लिए वह शत्रु के समान कार्य करता हैं।
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आत्मा न तो जन्म लेती है, न कभी मरती है 

और ना ही इसे कभी जलाया जा सकता है, 

ना ही पानी से गीला किया जा सकता है, 

आत्मा अमर और अविनाशी है।
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आत्मा पुराने शरीर को ठीक उसी तरह छोड़ देती है, 

जैसे कि मनुष्य अपने पुराने कपड़ों को उतार कर 

नए कपड़े धारण कर लेता है।
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केवल मन ही किसी का 

मित्र और शत्रु होता हैं।
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अगर आप अपना लक्ष्य पाने में नाकामयाब 

होते हो तो अपनी रणनीति बदलो, लक्ष्य नही।
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सभी मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होते हैं, 

जैसा वे भरोसा करते हैं, वो वैसा ही बन जाता हैं।
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निर्माण केवल मौजूदा 

चीजों का प्रक्षेपण हैं।
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अप्राकृतिक कर्म बहुत ज्यादा तनाव पैदा करता है, 

उससे मत डरो जो कि वास्तविक नहीं है और ना कभी था 

और ना कभी होगा, जो वास्तविक है, वो हमेशा था, 

और उसे कभी नष्ट भी नहीं किया जा सकता है।
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अत्याधिक क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि नष्ट होती है 

और जब बुद्धि नष्ट होती है, तब तर्क ही नष्ट हो जाता है, 

जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पूरी तरह पतन हो जाता है।
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मनुष्य को अगर अपने जीवन में सफलता हासिल करनी है तो, 

फल की इच्छा किए बिना ही कर्म करना चाहिए।
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जो व्यक्ति भूतकाल को लेकर पश्चाप करता रहता है, 

उस व्यक्ति का वर्तमान तो खराब हो ही जाता है, 

इसके साथ ही वह अपने भविष्य के लिए भी कुछ नहीं कर पाता है।
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अपने अनिवार्य कर्तव्यों को पूरा करो क्यूंकि 

कार्य करना संपूर्ण निश्कार्यता से बेहतर है।
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इंसान अपने विचारोंसे बनता है। 

जैसा वह सोचता है वैसा ही वह बनता है।
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कर्म का फल व्यक्ति को ठीक उसी तरह ढूंढ लेता है, 

जैसे कि कोई बछड़ा हजारों गायों के बीच अपनी मां को ढूंढ लेता है।
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मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता हैं, 

जैसा वो विश्वास करता हैं, वैसा वो बन जाता हैं।
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मन की गतिविधियों, होश, श्वास, और भावनाओं के माध्यम से 

भगवान की शक्ति सदा तुम्हारे साथ है और लगातार तुम्हे बस 

एक साधन की तरह प्रयोग कर सके सभी कार्य कर रही है।
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तुम उसके लिए शोक करते हो जो शोक करने 

के योग्य ही नहीं होते, और फिर भी ज्ञान की बातें करते हो, 

बुद्धिमान व्यक्ति ना तो जीवित और ना ही कभी 

मृत व्यक्ति के लिए शोक करते हैं।
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मन अशांत हैं और उसे नियंत्रित करना कठीण हैं, 

लेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता हैं।
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जो भी मनुष्य अपने जीवन के अध्यात्मिक ज्ञान के 

चरणो के लिए दृढ़ संकल्पो मे स्थिर हैं, वह समान्य रूप से 

कठोर संकटो को भी आसानी से सहन कर सकते हैं, 

और निश्चित तौर पर ऐसे व्यक्ति खुशियां और 

मुक्ति पाने के पात्र होते हैं।
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अपना-पराया, छोटा-बड़ा, 

मेरा-तेरा ये सब अपने मन से मिटा दो, 

और फिर सब तुम्हारा हैं और तुम सबके हो।
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जो व्यक्ति अपने मन को काबू में नहीं करते हैं, 

उनके लिए वह दुश्मन की तरह काम करता है।
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अर्जुन, केवल भाग्यशाली योद्धा ही ऐसा युद्ध 

लड़ने का अवसर पाते हैं, जो स्वर्ग के द्वार के समान हैं।
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भगवान या परमात्मा की शांति सिर्फ उनके 

साथ ही होती हैं, जिसके मन और आत्मा दोनों मे एकता हो, 

जो इच्छा और क्रोध से पूर्ण रुप से मुक्त हो एवं जो अपने 

अंदर की आत्मा को सही मायने मे जनता हो।
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आनंद बस मन की एक स्थिति है 

जिसका बाहरी दुनिया से कोई नाता नहीं है।
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जो कोई भी जिस किसी भी देवता की पूजा 

विश्वास के साथ करने की इच्छा रखता हैं, 

मैं उसका विश्वास उसी देवता में दृढ़ कर देता हूं।
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सुख का राज अपेक्षाए कम रखने में है।
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सदैव संदेह करनेवाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता 

ना इस लोक में हैं ना ही कही और।
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कोई भी उपहार/भेंट तभी अच्छी और पवित्र लगती हैं 

जब वह पूरी तरह दिल से किसी सही व्यक्ति को 

सही समय और सही जगह पर दिया जाए और 

जब उपहार देने वाला व्यक्ति उस उपहार के बदले 

में कुछ पाने का इच्छा बिल्कुल भी न करता हो।
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इस संसार में कुछ भी स्थाई नहीं है।
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मन शरीर का हिस्सा है, सुख दुख का एहसास 

करना आत्मा का नहीं शरीर का काम है ।
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मान, अपमान, लाभ-हानि खुश हो जाना या दुखी 

हो जाना यह सब मन की शरारत है ।
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वर्तमान परिस्थिति में जो तुम्हारा 

कर्तव्य है, वही तुम्हारा धर्म है।
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मैं ऊष्मा देता हूँ, मैं वर्षा करता हूँ और 

रोकता भी हूँ, मैं अमरत्व भी हूँ और मृत्यु भी।
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मेरे भी कई जन्म हो चुके हैं, 

तुम्हारे भी कई जन्म हो चुके हैं, 

ना तो यह मेरा आखिरी जन्म है और 

ना यह तुम्हारा आखिरी जन्म है ।
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हे अर्जुन अगर तुम अपना कल्याण चाहते हो, 

तो सभी उपदेशों, सभी धर्मों को छोड़ कर मेरी 

शरण में आ जाओ, मैं तुम्हें मुक्ति प्रदान करुंगा ।
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मोहग्रस्त होकर अपने कर्तव्य पथ से हट जाना मूर्खता है, 

क्योंकि इससे ना तो तुम्हें स्वर्ग की प्राप्ति होगी 

और ना ही तुम्हारी कीर्ति बढ़ेगी ।
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धर्म युद्ध में कोई भी व्यक्ति निष्पक्ष नहीं रह सकता है. 

धर्म युद्ध में जो व्यक्ति धर्म के साथ नहीं खड़ा है 

इसका मतलब है वह अधर्म का साथ दे रहा है, 

वह अधर्म के साथ खड़ा है ।
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भगवान प्रत्येक वस्तु में, 

प्रत्येक जीव में मौजूद हैं ।
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मुझे जानने का केवल एक हीं तरीका है, 

मेरी भक्ति, मुझे बुद्धि द्वारा कोई न 

जान सकता है, न समझ सकता है ।
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आत्मा का अंतिम लक्ष्य 

परमात्मा में मिल जाना होता है ।
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मैं सभी प्राणियों को जानता हूँ, सभी के भूत, 

भविष्य और वर्तमान को जानता हूँ. 

लेकिन मुझे कोई नहीं जानता है ।
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जो मुझे जिस रूप में पूजता है… 

मैं उसी रूप में उसे उसकी पूजा का फल देता हूँ ।
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जन्म लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु निश्चित है, 

और मरने वाले व्यक्ति का फिर से जन्म लेना निश्चित है ।
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मैं हीं इस सृष्टि की रचना करता हूँ, 

मैं हीं इसका पालन-पोषण करता हूँ 

और मैं हीं इस सृष्टि का विनाश करता हूँ ।
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कोई भी उपहार/भेंट तभी अच्छी और पवित्र लगती हैं 

जब वह पूरी तरह दिल से किसी सही व्यक्ति को 

सही समय और सही जगह पर दिया जाए और 

जब उपहार देने वाला व्यक्ति उस उपहार के बदले 

में कुछ पाने का इच्छा बिल्कुल भी न करता हो।
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... Thank You ...
                                                                                                                                                                                                              

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