Kya Tumhein Pata Hai - Sainee Raj | Unerase Poetry - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Kya Tumhein Pata Hai - Sainee Raj | Unerase Poetry

Kya Tumhein Pata Hai - Sainee Raj | Unerase Poetry
Kya Tumhein Pata Hai - Sainee Raj | Unerase Poetry

इस कविता के बारे में :

इस काव्य 'क्या तुम्हें पता है' को UnErase Poetry के लेबल के तहत 'सैनी राज' ने लिखा और प्रस्तुत किया है।

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क्या तुम्हें पता है कि टूटते तारे

टूटकर कहाँ जाते होंगे

धूप रात में कहाँ सोती होगी

क्या पक्षियों को भी अपने घर की याद 

आती होगी नदी बहकर समुन्दर 

से मिलती है समन्दर किससे मिलता होगा

***

क्या तुम्हें पता है कि टूटते तारे, तारे नहीं 

कहलाते मिट्टी, मिट्टी गिरती है बस आसमान 

से पर मिट्टी से ही पेड़ उगते है

***

क्या तुम्हें पता है कि पेड़ों की इतना कसकर 

जमीन से क्यू लिपटती है क्या उन्हें भी किसी 

के साथ होने का एहसास भाता होगा 

क्या इसलिए हम कसकर अपनी यादों 

को पकड़े बैठे हैं कि एक दिन उनपर 

भी फूल खिलाए

***

क्या तुम्हें पता है पेड़ों पर आशिक अपना 

नाम क्यूँ लिख जाते मरने जीने की कसमें 

जब खो जाती होंगी तो कहा जाकर 

सिसकियाँ लेती होंगी आदतें कभी ना कभी 

छूट जाती होंगी ऐसे में कलमकार पेड़ों पर 

क्या लिख जाते होंगे क्या तुम्हें पता है 

उन पेड़ों पर कविताएं खिलती है

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सुनिए इस कविता का ऑडियो वर्शन


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... Thank You ...



( Disclaimer: The Orignal Copyright Of this Content Is Belong to the Respective Writer )
                                                                                                                                                                                                                                                                      

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