Phir Kisi Ko Ishq Hua Hai | Mukund Nair | Poetry - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Phir Kisi Ko Ishq Hua Hai | Mukund Nair | Poetry

Phir Kisi Ko Ishq Hua Hai | Mukund Nair | Poetry
Phir Kisi Ko Ishq Hua Hai | Mukund Nair | Poetry

इस कविता के बारे में :

इस काव्य 'फिर किसी को इश्क़ हुआ है' को G Talks के लेबल के तहत 'मुकुंद नायर' ने लिखा और प्रस्तुत किया है।

*****

आज मोहल्ले मे एक हादसा हुआ

किसी को पहला प्यार सा हुआ

आसमान मे कुछ रंग सा उड़ा

नफ़रतो की साजिश मे कुछ भंग सा प़डा

मैं वहां खड़ा कुछ दंग सा खड़ा

क्युकी मुझे ख़बर थी कि मुक़द्दर को

इस रिश्ते से नाराजगी थी

***

वो लड़का भक्त था भोलेनाथ का

और वो लड़की पांच वक्त नमाज़ी थी

के उनका बिछड़ना तय था

क्युकी मजहब सारे प्यार करो और

प्यार से रहो सीखाते रहे और

लोग उसे मजहब के नाम 

प्यार की कालिया जलाते रहे

के मान गए ज़माने तुझे

***

तू दिल तोड़ने मे बड़ा पेशेवर है

निकल कर देखो कभी गली मे

हर मोड़ पर मोहब्बत की एक कब्र है 

के अपने प्यार को बिखरता देखने वाले 

उन नौजवानों की आखों मे चलो 

निराशा देखते है 

आज फिर मोहल्ले मे किसी को 

प्यार हुआ है 

चलो तमाशा देखते हैं

***

कि जब मैं छोटा था शायद थोड़ा खोटा था 

के सोचता था कि प्यार वो एहसास हैं 

जो है साजन से सैइया तक 

बहन से भैया तक 

बालक से मैया तक वो पापा 

की चिंता भरी मार से कॉलेज 

वाले यार तक के प्यार वो धागा है 

जिंदगी की मोती माला मे के प्यार 

तो कहीं भी हो सकता है

***

हो तो मंदिर मस्जिद मइयत 

महफिल या मधुशाला मे

के मैं सोचता था बचपन मे के 

प्यार के वादे अमर है 

बड़ा हुआ तो समझा जनाब 

ये तो इंस्टा बायो में नाम लिखने से 

नाम हटाने तक का सफर है ये 

बातें सारी फिजूल की हैं 

ये बातें सारी नाम की हैं 

***

बैठो बैठो कौन सी काट दू यहा 

रस्सी दे हर दाम की है 

कोई बाइक दिखा कर खरीदता है 

तो कोई ओदा दिखा कर 

कोई इस जुए मे दोस्त खोकर टिकता है 

तो कोई अपना स्वाभिमान लुटाकर

अरे कितनी लड़किया ऐसी होंगी

***

जो माय गाय माय गाय माय 

गाय कहने के बदले

अपनी जिम्मेदारियाँ से हारे बैठे 

बन्दे से कंधे मिलाकर

कहती होंगी तू कर लेगा मुझे 

तुझ पर भरोसा है

***

अरे सहाब इन्हीं लड़कियों ने तो 

अपनी सखियों के संग बैठ

उस लड़के को कोसा है के लड़के कम नहीं 

तू ये मत पहन तू वो मत पहन 

तू यहा मत जा तू वहां मत जा 

कहने वालों लड़कों क्या इतनी लक्ष्मण 

रेखायें तुमसे खुद सहन होगी

***

शायद समझ जाओगे अपनी महबूबा 

की मुसीबतें जब चूडिय़ां की जगह बेड़िया

पहने तुम्हरी खुद की बहन होगी

के उम्मीद रखने वालों थोड़ा सुधर जाओ 

आओ इस एपिसोड मे प्यार की 

मॉडर्न परिभाषा देखते हैं 

आज फिर मोहल्ले में किसी 

को प्यार हुआ है 

चलो तमाशा देखते हैं

***

के मैं समझ चुका हू के सच्चे प्यार 

की वो किस्से कहानिया 

आज बस शायरों का शौक बनकर रह गया है 

लैला मजनू, हीर रांझा जो कभी 

मिशाल हुआ करते थे 

***

आज बस टिक टोक बनकर रह गए हैं

के जो लड़किया सात जन्मों 

का वादा करती है 

सात हफ़्तों मे छोड़ देती है 

पहले ही मालूम था कि जात मे भेद हैं 

पापा को खेद है फिर भी हा कहकर 

दिल तोड़ देती है

***

के यहा लड़के हाँ मे हाँ मिलाने 

वाली लड़कियों को 

जानेमन कहते हैं और अगर उस 

लड़की ने इंकार किया तो

तो उसे भरी महफिल मे बचचलन कहते हैं 

के शिवानी ओ शिवानी जपने वाले लड़के 

एक पल मे पलटी खाकर दिल मे 

नताशा देखते हैं

***

आज फिर मौहल्ले मे किसी को प्यार 

हुआ है चलो तमाशा देखते है

के मैं पूरी हिम्मत हारा नहीं वो 

मुकम्मल मोहब्बत का दौर 

फिर लौट आएगा ये 

***

भरोसा लिए मुझ जेसे 

कुछ शायर आप कुछ नौजवानों की 

आखों में आशा देखते हैं 

आज फिर मोहल्ले में किसी को 

प्यार हुआ है 

चलो बाकी का अब समझ जाओ

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सुनिए इस कविता का ऑडियो वर्शन


( Use UC Browser For Better Audio Experience )

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... Thank You ...



( Disclaimer: The Orignal Copyright Of this Content Is Belong to the Respective Writer )
                                                                                                                                                                                                                                          

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