Chakkar by Nidhi Narwal | FNP Center Stage | FNP Media - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Chakkar by Nidhi Narwal | FNP Center Stage | FNP Media

Chakkar by Nidhi Narwal | FNP Center Stage | FNP Media
Chakkar by Nidhi Narwal | FNP Center Stage | FNP Media

इस कविता के बारे में :

इस काव्य 'चक्कर' को FNP Media के लेबल के तहत निधि नरवाल ने लिखा और प्रस्तुत किया है।

*****

किसी भी रिश्ते मे रूठना मानना चलता है

कभी कभी दूरिया भी आ जाती है 

बहुत ज्यादा मगर यार ऐसा है 

कि अगर तुम्हारे दिल मे और उस शख्स 

के दिल में तुम्हारे लिए और तुम्हारे दिल 

मे उस शख्स के लिए जो फिक्र हैं

***

ना वो सच्ची है तो तुम्हें ये बात हमेशा 

याद रखनी चाहिए कि जो दूरिया है 

ये बस कुछ पल की है और अक्सर बातें 

याद रखने के लिए हम क्या करते हैं

***

तो यही बात खुद को याद दिलाने के 

लिए लिखा हैं मेने एक ख्याल चक्कर

***

एक बहुत बाड़ा गोल सा चक्कर है 

किसी मैराथन ट्रैक के जैसा

इस चक्कर का अखिर चक्कर क्या है 

देखो इस चक्कर पर न तुम और मैं 

खड़े हैं तुम नहीं तुम और मैं मगर एक

***

दूसरे की तरफ पीठ करके

तुम उस तरफ मुह किए हो और मैं 

इस तरफ क्युकी अभी अभी हम दोनों 

ने अपनी अपनी अना को अपनी अपनी 

मोहब्बत से उपर रखकर ये तय किया है

***

कि अब से तुम उस तरफ चलोगे और 

मैं इस तरफ कुछ फैसले लिए है 

कि अब से ये राहें अलग अलग हैं

अब से हाथ पकड़कर क्या हाथ छोडकर

***

भी साथ नहीं चलना

तुम रोने लगे तुम्हारे पास भागते 

हुए नहीं आना हैं और अगर मैं गिरने 

लगी तो तुम ये हरगिज़ नहीं दिखाओगे

***

कि तुम अब भी परवाह करते हो

और पीछे नहीं मुड़ना याद रखना 

पीछे नहीं मुङना याद रखना बिल्कुल 

ऐसा ही करना हैं अलग अलग चलना है

***

अकेले चलना हैं चलते जाना है 

एक दूसरे से दूर होते जाना हैं और 

पीछे मुड़कर नहीं देखना हैं टस से मस 

नहीं होना है चाहे कुछ भी हो जाए

***

1 सेकंड,

तब क्या होगा जब इस बड़े से चक्कर की 

ये दो राहे जिन पर हम अलग अलग 

चल रहे हैं ये दोनों एक दूसरे की तरफ 

आने लगेंगे तुम यहा आने लगोगे मैं वहां 

जाने लगूंगा ना तुम वापिस मुड़ पाओगे

***

ना मैं वापिस मुड़ पाउंगा क्युकी पीछे नहीं 

मुड़ ना हैं ये तो हमने तय किया था और 

चलो मान ले मुड़ जाते हैं दोनों मे से 

अगर कोई भी एक शख्स मुड़ा और वो

***

दूसरा नहीं मुड़ा तो वो एक दूसरे के पीछे 

चलने लग जाएगा और मानो अगर दोनों 

के दोनों मुड़ गए तो वो दोनों एक दूसरे 

की तरफ चलने लग जाऐंगे ये सिलसिला 

चलता रहेगा तुम और मैं चलते रहेंगे

***

कभी इस तरफ कभी उस तरफ और घूमते 

फिरते कभी एक दूसरे की तरफ और 

वेसे ना अलग अलग दिशा मे चलने मे भी 

मुझे कोई ऐतराज़ नहीं क्युकी देखो दो

***

लोग है एक यहा खड़ा है एक यहा खड़ा हैं 

ईन दो लोगों को अगर एक दूसरे से दूर 

जाना हैं तो अलग अलग दिशा मे चलना 

पड़ेगा मगर अगर उन लोगों को एक 

दूसरे के करीब आना है तो भी अलग 

अलग दिशा मे ही चलना

पड़ेगा

***

तुम्हारा और मेरा रिश्ता महज एक चक्कर 

के जेसा है तुम यहा जाओ या यहा वहा 

जाओ तुम कहीं ना कहीं मुझसे टकरा ही

***

जाओगे और फिर अलग अलग भी चलोगे 

घूम फिर कर मेरे पास ही आओगे अब 

ज़माना यू ही थोड़ी ना कहता हैं कि 

इसका और इसका चक्कर चल रहा है

*****

सुनिए इस कविता का ऑडियो वर्शन


( Use UC Browser For Better Audio Experience )

*****


... Thank You ...



Disclaimer: The Orignal Copyright Of this Content Is Belong to the Respective Writer )
                                                                                                                                                                                  

Post a Comment

0 Comments