Main Har Bewafa Shaks Ki Aukaat Likhti Hun | Goonj Chand | Poetry - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Main Har Bewafa Shaks Ki Aukaat Likhti Hun | Goonj Chand | Poetry

Main Har Bewafa Shaks Ki Aukaat Likhti Hun | Goonj Chand | Poetry
Main Har Bewafa Shaks Ki Aukaat Likhti Hun | Goonj Chand | Poetry


इस कविता के बारे में :

इस काव्य 'मैं हर बेवफा शख्स की औकात लिखती हूँ' को Goonj Waves के लेबल के तहत 'गूँज चाँद' ने लिखा और प्रस्तुत किया है।

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हाथ में दर्द लिए गमो के पन्ने बिछा 

उनपे अपने जज़्बात लिखती हूँ

जी हा में वही हु जो हर बेवफा शख्स 

की औकात लिखती हूँ


***


जब वफ़ा करने का दम नहीं तो कियूं 

किसी की ज़िन्दगी में जाते हो 

और तो और ज़िन्दगी भर साथ निभाने 

की झूठी कसमें भी खाते हो


***


तुम जैसे झूठे लोगो को ही में सरे आम 

बे नक़ाब करती हूँ जी हा

में वही हु जो हर बेवफा शख्स 

की औकात लिखती हूँ


***


अकेले में इतना प्यार जिसकी कोई 

हद नहीं और महफ़िल में हम जस्ट फ्रेंड 

है और कुछ नहीं 

लोगो की इन्ही सब बातो से में उनका 


***


डबल फेस भी भाप लेती हूँ 

जी हा में वही हु जो हर बेवफा शख्स 

की औकात लिखती हूँ


***


तुम्हे क्या लगता है बेवफाई करने की 

कोई सजा नहीं होती 

वक़्त आने पर इन जैसे लोगो के पास 

हसने की कोई वजह नहीं होती 


***


इसलिए हर गलत चीज़ के खिलाफ में 

अपनी आवाज़ रखती हूँ 

जी हा में वही हु जो हर बेवफा शख्स 

की औकात लिखती हूँ


***


हाथ में दर्द लिए गमो के पन्ने बिछा 

उनपे अपने जज़्बात लिखती हूँ

जी हा में वही हु जो हर बेवफा शख्स 

की औकात लिखती हूँ

*****



... Thank You ...





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