Ladko Ki Kahani | Akriti | The Social House Poetry - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Ladko Ki Kahani | Akriti | The Social House Poetry

Ladko Ki Kahani | Akriti | The Social House Poetry
Ladko Ki Kahani | Akriti | The Social House Poetry


इस कविता के बारे में :

इस काव्य 'लड़को की कहानी' को Social House के लेबल के तहत आकृति ने लिखा और प्रस्तुत किया है।


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अगर मिल गयी है तुझे इश्क़ मे बेवफ़ाई

तो उस ज़ालिम की कुछ ऐसी दशा करना

न देना ज़हर न देना बद्दुआ


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करना अपनी कामयाबियों से तबाह उसे

कि वो खुद गर्ज होकर भी इक फितूर लिये बैठे हैं

यह दिल भी आज उनके लिये धड़कता हैं

यह जहन में गुरूर लिये बैठे हैं


***


जब आंख खुली इस दुनिया मे 

तो हर किसी को हस्ता पाया था

वजह सोची तो पता चला की उनके 

घर का चिराग यानी मैं, मैं जो घर आया था


***


पापा मम्मी दादा नानी मानो सबकी 

खुशियो का अंदाजा नहीं था 

किसी ने मुझे कान्हा, 

किसी ने अर्जुन तो किसी ने भोला 


***


भंडारी कहकर बुलाया था

नाम सभी सब सुन्दर थे पर उनके 

पीछे की वजह बड़े देर वक़्त बाद समझ आयी थी

वो नाम महज नाम नहीं थे उनके पीछे


***


छिपी उनकी विशेषता के चलते 

मुझसे उम्मीद लगायी थी

कोई मुझे डॉ तो कोई मुझे इंजीनियर 

तो कोई मुझे architect बनाना चाहता था


***


पर इन सब मे इन्होने ये क्यू नहीं पूछा

कि मैं क्या बनना चाहता था

बड़े होते हुए ही मानो हर स्टेज प्लान था 

कब मुझे कौन सी


***


यूनिवर्सिटी मे पढ़ना हैं किस उम्र मे 

कितना समझदार बनना हैं ये 

सब कुछ decided था

मैं भी ख्वाबो की दुनिया को समेट कर


***


सबकी उम्मीदों को importance देने का 

फैसला कर चुका था मेरे पैशन मेरा 

interest सब एक बक्से मे लॉक करके

यकीन मानो पूरी शिद्दत से उनका सपना


***


पूरा करने का प्रयास किया था

पर ये क्या मेंने अपने दिल को तो रोक लिया था

पर ये दिमाग जो अब तक मेरी गिटार की


***


स्प्रिंग मे फंसा हुआ था एंड वक़्त पर 

साला वो भी मुझे धोका दे गया था

अब हर दिन दिल और दिमाग के झगड़े


***


मे अपने पैशन को खोता देखता 

हू खैर यह पैशन secondary हैं

MNC मे जॉब लग गयी हैं कम से कम 

अपने माँ बाप का राजा बेटा हू


***


हर दिन ये समाज मुझको ऊँचे ओदे वाले 

लोगों से तोलता हैं मैं चाहे कितनी भी 

कोशिश कर लू पर तूने लाइफ में क्या 

ही किया है साला यही कमेन्ट 

repeated mode पर बोलता हैं


***


गुस्से frustration गिल्टी में कभी कभी 

जी भरकर रोने का मन कर्ता हैं

बस पागल है रोना मत भूल कर भी क्या 

क्या तू एक लड़का हैं हा समझ गया लड़का


***


हू मैं लेकिन मेरे भी ज़ज्बात है नहीं दोड़ना 

मुझे अमीरी की अंधी दोड़ मे

कुछ छोटे छोटे लम्हों मे जीना यहीं 

मेरे कुछ ख़ाब है


***


जिंदगी जी भरकर जी लेने के लिए

हा नहीं हू मे ट्रम्प और अम्बानी के जैसा

न किसी शतरंज का इक्का हू

हा मुश्किल वक़्त पर काम आऊंगा


***


मैं अपने माता पिता का एक खोटा सा सिक्का हू

हालत लिखोगे ज़ज्बात लिखोगे

कई बेमंजिल दिनों की कहानी

कई बेचैन रातों के फरमान लिखोगे


***


और यकीन मानो मेरे दोस्त जो लिखना 

शुरू करो तो लिखते ही रहना

क्युकी यही वो कुछ पल हैं जिनके बहीखातों से 

अपनी कामयाबी की बेमिसाल दास्तान लिखोगे


*****



... Thank You ...





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