Jab Hum Ajnabi Hote Hai | Goonj Chand | Poetry - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Jab Hum Ajnabi Hote Hai | Goonj Chand | Poetry


Jab Hum Ajnabi Hote Hai | Goonj Chand | Poetry
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इस कविता के बारे में :

इस काव्य 'जब हम अजनबी होते है' को G-talks के लेबल के तहत गूँज चाँद ने लिखा और प्रस्तुत किया है।

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कितनी अच्छी होती है न ज़िन्दगी 

जब हम अजनबी होते है 

कियुकी तब हमारी ज़िन्दगी के हर फैसले

हमारे खुद के होते है 


***


न कोई रोक होती है न कोई टोक होती है 

बाते भी तब हर रोज़ होती है 

तब हम दूर होकर भी बहुत करीब होते है 

कितनी अच्छी होती है न ज़िन्दगी 

जब हम अजनबी होते है 


***


हर रिश्ते में पूरी रेस्पेक्ट होती है 

केयर भी तब तू मच होती है 

ज़िन्दगी में कुछ फैसले भी ज़रूरी होते है 

कितनी अच्छी होती है न ज़िन्दगी 

जब हम अजनबी होते है 


***


न ही कोई शक की दीवार होती है 

न ही प्यार की रुस्वाई सरे आम होती है 

एहसास के रिश्ते न ही कभी फरेबी होते है 

कितनी अच्छी होती है न ज़िन्दगी 

जब हम अजनबी होते है 


***


ना ही किसी को पाने की खुशी होती है 

ना ही किसी को खोने का गम होता है 

प्यार के नाम न ही कोई सवाल जवाब होते है 

कितनी अच्छी होती है न ज़िन्दगी 

जब हम अजनबी होते है 


***


न ही सारी रात यू आँखों में बर्बाद होती है 

न ही होठो पे किसी के लिए कोई फ़रियाद होती है 

और न ही तब हम किसी एक्सपेक्टेशन 

का शिकार होते है 

कितनी अच्छी होती है न ज़िन्दगी 

जब हम अजनबी होते है


*****



... Thank You ...



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