Ab Mohabbat Karun Bhi To Kissey Karun | Md. Zaid | The Social House Poetry - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Ab Mohabbat Karun Bhi To Kissey Karun | Md. Zaid | The Social House Poetry

Ab Mohabbat Karun Bhi To Kissey Karun | Md. Zaid | The Social House Poetry
Ab Mohabbat Karun Bhi To Kissey Karun | Md. Zaid | The Social House Poetry


इस कविता के बारे में :

इस काव्य 'अब मोहब्बत करू भी तो किससे करू' को Social House के लेबल के तहत मोहम्मद ज़ैद ने लिखा और प्रस्तुत किया है।

शायरी...

कि मैं सहम जाता हू उसे खोने के ख्याल से वरना मैं कोई कायर नहीं और मैं लिख लेता हू थोड़ा बहुत वरना मैं आशिक हू शायर नहीं

***

ना कोई परेशान थी ना ही कोई मजबूरी थी गलती हमारी नहीं ये कहानी खुदा ने लिखी ही अधूरी थी


पोएट्री...

*****

अब मोहब्बत करू भी तो किससे करू

अब रात रात भर बातें करू भी तो किससे करू

एक तू ही तो था सुनने समझने वाला

अब शिकस्ता दिल का हाल वाया 

भी करू तो किससे करू


***


जिंदगी भर साथ रहने का ख्वाब देखे थे

अब अकेला भी उन ख्वाबों को भी 

पूरा करू तो कैसे करू

तेरा हाथ पकड़ कर चला जहां

तन्हा उन रास्तो मे चलू भी तो कैसे चलू


***


मेरे दिल ने चाहा है तुझे मुझे से भी ज्यादा

अब तुझे इस दिल से रुखसत 

करू भी तो कैसे करू


***


और तुझे कुछ सालों मैं बेपनाह चाहा है

अब तुझे भूल जाऊँ ये मैं कैसे करू

तू उदास मत होना चाहे मैं रहूं या ना रहूँ

ये कहा था ना तूने तो मैं रंज 


***


करू भी तो कैसे करू

तेरी यादें अब मुझे जीने नहीं देती और 

खुदकुशी गुनाह हैं मेरे मजहब मैं तो 

तू बता मरू भी तो कैसे मरू


*****


... Thank You ...



Disclaimer: The Orignal Copyright Of this Content Is Belong to the Respective Writer )
                                                                                                                                                                                                                                                                                                  

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