Tu Hai Agar Dhokebaz To Main Bhi Bazaru Nahi Hun | Goonj Chand | Poetry - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Tu Hai Agar Dhokebaz To Main Bhi Bazaru Nahi Hun | Goonj Chand | Poetry

Tu Hai Agar Dhokebaz To Main Bhi Bazaru Nahi Hun | Goonj Chand | Poetry
Tu Hai Agar Dhokebaz To Main Bhi Bazaru Nahi Hun


इस कविता के बारे में :

इस काव्य 'तू है अगर धोकेबाज़ तो मैं भी बाज़ारू नहीं हूँ' को G-talks के लेबल के तहत गूँज चाँद ने लिखा और प्रस्तुत किया है।

*****

किसी के लिए देदू अपनी जान 

इतनी भी हारी नहीं हूँ

और मोहब्बत निभानी वाली हूँ 

जनाब मोहब्बत की मरी नहीं हूँ

***

तू है अगर धोकेबाज़ तो मैं भी 

बाज़ारू नहीं हूँ

और तू है अगर कूल डैशिंग बाँदा 

तो में भी अबला नारी नहीं हूँ

***

है अगर मोहब्बत निभाने का 

दम रखता है तू

तो में भी ऐसी मोहब्बत में पीछे 

हटने वाली नहीं हूँ

और मोहब्बत निभानी वाली हूँ जनाब 

मोहब्बत की मरी नहीं हूँ

***

गेडिया मरता है अगर तू रातो 

में सड़को पर

तो में भी तेरा इंतज़ार करने 

वाली नहीं हूँ

और दारु पीकर लेट आने 

की आदत है तुझे

तो में भी तेरे लिए घर का गेट 

खोलने वाली नहीं हूँ

***

हाँ अगर जनता है तू औरत 

की इज्ज़त करना

तो में भी तेरी प्राइवेसी छीनने 

वाली नहीं हूँ

और मोहब्बत निभानी वाली हूँ जनाब 

मोहब्बत की मरी नहीं हूँ

***

तू है अगर बात बात पे 

गली देने वाला 

तो में भी चुप होकर सुनने 

वाली नहीं हूँ

तू होगा राजा बेशक अपने 

घर में मगर 

पापा की रानी हूँ में भी तेरी 

नौकरानी नहीं हूँ

***

और तू है अगर बीवी का ख्याल 

रखने वाला तो

में भी किसी के आगे तेरा सर झुकाने 

वाली नहीं हूँ

और मोहब्बत निभानी वाली हूँ जनाब 

मोहब्बत की मरी नहीं हूँ

***

किसी के लिए देदू अपनी जान 

इतनी भी हारी नहीं हूँ

और मोहब्बत निभानी वाली हूँ जनाब 

मोहब्बत की मरी नहीं हूँ

*****


... Thank You ...



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