Har Aurat Samaj Ki Dabai Nazar Aati Hai | Goonj Chand | Poetry - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Har Aurat Samaj Ki Dabai Nazar Aati Hai | Goonj Chand | Poetry

Har Aurat Samaj Ki Dabai Nazar Aati Hai | Goonj Chand | Poetry
Har Aurat Samaj Ki Dabai Nazar Aati Hai


इस कविता के बारे में :

इस काव्य 'हर औरत समाज की दबाई नज़र आती है' को Goonj Waves के लेबल के तहत गूँज चाँद ने लिखा और प्रस्तुत किया है।

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लोग कहते है इस औरत में हमे 

खुद्दारी नज़र आती है

और अपने उसूलों पे चलती हु में 

इसमें मुझे खुद की ईमानदारी नज़र आती है

***

और क्या उम्मीद राखी जाये उन 

मर्दो इस दुनिया में भला

जिन्हे अपने आगे हर औरत हारी नार आती है

इसीलिए अपने उसूलों पे चलती हु में 

इसमें मुझे खुद की ईमानदारी नज़र आती है

***

वो क्या समझेंगे किसी की ख्वाइशो को भला

जिन्हे केवल पूरे कपड़े पहनने लड़किया 

ही खानदानी नज़र आती है

और किसी भी औरत को कमजोर 

समझने की गलती मत करना

कियुँकि वक़्त आने पर वही औरत 

काली नज़र आती है

अपने उसूलों पे चलती हु में इसमें मुझे 

खुद की ईमानदारी नज़र आती है

***

इज़्ज़त दो औरत को व्याह कर 

लाये हो खरीद कर नहीं

कियुँकि खरीदारी के नाम पर तो यह 

दहेज़ की दूकान दारी नज़र आती है

और समाज का डर है यहां 

अपनी खुशियों से ज्यादा

हर औरत यहां समाज की 

दबाई नज़र आती है

अपने उसूलों पे चलती हु में इसमें 

मुझे खुद की ईमानदारी नज़र आती है

***

अब बंद करो हर बात पे रोना और 

स्टैंड लो खुद के लिए

कियुँकि इसी में खुद की 

खुद्दारी नज़र आती है

अपने उसूलों पे चलती हु में इसमें मुझे 

खुद की ईमानदारी नज़र आती है

*****


... Thank You ...



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