Mujh Jaisi Ladki - Sainee Raj | UnErase Poetry - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Mujh Jaisi Ladki - Sainee Raj | UnErase Poetry


Mujh Jaisi Ladki - Sainee Raj | UnErase Poetry
Mujh Jaisi Ladki - Sainee Raj | UnErase Poetry

इस कविता के बारे में :

इस काव्य 'मुझ जैसी लड़की' UnErase Poetry के लेबल के तहत 'सैनी राज' ने लिखा और प्रस्तुत किया है।

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अकेली खोई-खोई सी वो अल्हड लड़की

इश्क़ में जगी सोई सी दीवानी लड़की

कानो में झुमके चाल में अंगड़ाई 

एक दीवाने से दिल लगाए

सबने कहा पागल हो गयी है पागल लड़की

इश्क़ में जगी सोई सी दीवानी लड़की


***


न दुनिया की समझ न सही और गलत का फर्क

इश्क़ के रंग से रंग दिया अपने दिल का बरक

न तजुर्बा न समझदारी बड़ी कमसिन थी वो

तूफ़ान में कश्ती उतारे बड़ी मासूम थी वो


***


इश्क़ की कमाई से घर-घर खेलती

अपनी धुन में मस्त वो मीरा सी लड़की

चाँद से दिल लगा कर ज़मीन से वफाई मांगती

हवाओ से लड़ने वाली वो पतंग सी लड़की


***


जब आंख खुली तो थी नहीं अब 

भी वो छोटी सी लड़की

दिल को हथेली पे परोज़ के देने 

वाली वो भोली सी लड़की

कहते है कुछ भारी सा गुज़रा था 


***


उसके नरम से सेने के ऊपर से

अब ज़रा नाप तोल के हस्ती है वो 

मनमौजी सी लड़की हक़ीक़त दरवाज़े 

पे दस्कत दे रही थी

भला पलक झपकती तो किस के 

लिए वो सपनो जैसी लड़की


***


समेट के अपनी आबरू फिर कलम उठाएगी

खुद अपनी कहानी लिखेगी वो ज़िद्दी सी लड़की

पुर्ज़ा-पुर्ज़ा कर जोड़ेगी अपना सीना हिम्मत कर फिर

दिल लगाएगी वो दिलेर लड़की


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लब्ज़ो को ढाल बनाकर हर मक़ाम पायेगी

खुदी खुद से बाते करने वाली वो किताबो सी लड़की

तखि सी मीठी सी वो हिरणी सी लड़की

आईने में देखु तो मुझ जैसी वो

मुझ जैसी लड़की


*****


... Thank You ...



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