Kitni Badal Gayi Hun Main | Goonj Chand | Poetry - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Kitni Badal Gayi Hun Main | Goonj Chand | Poetry


Kitni Badal Gayi Hun Main | Goonj Chand | Poetry
Kitni Badal Gayi Hun Main | Goonj Chand | Poetry

इस कविता के बारे में :

इस काव्य को 'कितनी बदल गयी हूँ मैं' G-talks के लेबल के तहत 'गूँज चाँद' ने लिखा और प्रस्तुत किया है।

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कुछ रिश्तो को सभालते-सभालते बिखर गयी हु में

देखो कितनी बदल गयी हूँ मैं


***


में वो लड़की थी जो अपनी मर्ज़ी की 

मालिक हुआ करती थी

हज़ारो लड़को की बेहेस में भी सबसे 

आगे हुआ करती थी

पर आज एक इंसान की वजह से 

कितनी सेहम गयी हु में

देखो कितनी बदल गयी हूँ मैं


***


कपड़े किसी और की पसंद के पहनू 

सवाल ही पैदा नहीं होता था

और इस बात पे मुझे समझाना 

किसी के बस में नहीं होता था

पर आज किसी की खुशी की लिए 

अपनी इच्छाओ का दम घटना भी

सिख गयी हु में देखो कितनी बदल गयी हूँ मैं


***


जहा कभी मेरे पास लोगो को बेवजह 

हँसाने के ideas हुआ करते थे

आज वह मेरे पास मेरी तन्हाई और 

मेरे खोकले जज़्बात है

नहीं समझ पता कोई मुझे आजकल 

कियुँकि सब सुनते सिर्फ मेरे अलफ़ाज़ है

वर्षो पुराने वीरान पड़े खंडर की तरह 

सुनसान सी होगयी हु में

देखो कितनी बदल गयी हूँ मैं


***


केहने को तो सब अपने है पर अपना कोई दीखता नहीं

मतलब के है रिश्ते सरे बे-मतलब कोई मिलता नहीं

किसी के बदलने की उम्मीद में उस जैसी 

ही हो गयी हु में देखो कितनी बदल गयी हूँ मैं


***


कुछ रिश्तो को सभालते-सभालते बिखर गयी हु में

देखो कितनी बदल गयी हूँ मैं

देखो कितनी बदल गयी हूँ मैं


*****


... Thank You ...



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