Famous Two Line Shayari Of Mirza Ghalib 2019 - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Famous Two Line Shayari Of Mirza Ghalib 2019

Famous Two Line Shayari Of Mirza Ghalib 2019
Famous Two Line Shayari Of Mirza Ghalib 2019
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जिस व्यक्ति ने दुनिया को शब्दों में बुनना सिखाया, मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग खान, जिन्हें दुनिया में उनकी कलम के रूप में जाना जाता है, ग़ालिब का जन्म 1797 में आगरा में हुआ था, वह बहादुर शाह के दरबार में एक प्रसिद्ध कवि थे। दूसरा।

7 बच्चों को खोने के बाद, उन्होंने उर्दू, तुर्की, फारसी में अपना जीवन कविता को समर्पित कर दिया। ग़ालिब साहब निस्संदेह उन बेहतरीन उर्दू कवियों में से एक हैं जिन्हें भारत ने कभी देखा है। वह आदमी जिसने शब्दों को जीवन दिया, प्रत्येक भाव को शब्द और प्रत्येक शब्द को भावना।

उन्होंने 11 साल की उम्र से कविता लिखना शुरू कर दिया था। उनका ज्यादातर काम उदासी और निराशा पर है, लेकिन उन्होंने कुछ बहुत अच्छी प्रेम कविता भी लिखी।
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We bring you some of  Mirza Ghalib Shayaris
that is extremely heart-warming.

मत पूँछ की क्या हाल हैं मेरा तेरे पीछे ,

तू देख की क्या रंग हैं तेरा मेरे आगे …

mirza ghalib 2 line shayari facebook


ऐ बुरे वक़्त ज़रा अदब से पेश आ ,


क्यूंकि वक़्त नहीं लगता वक़्त बदलने में …

Tip: To Copy Status, Tap & Hold On The Status


ज़िन्दगी उसकी जिस की मौत 


पे ज़माना अफ़सोस करे ग़ालिब ,



यूँ तो हर शक्श आता हैं 


इस दुनिया में मरने कि लिए …

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ज़ाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर ,



या वह जगह बता जहाँ खुदा नहीं ..




क़ैद-ए-हयात-ओ-बंद-ए-ग़म,


अस्ल में दोनों एक हैंमौत से 


पहले आदमी ग़म से निजात पाए क्यूँ?





इस सादगी पर कौन ना मर जाये



लड़ते है और हाथ में तलवार भी नहीं




उनके देखे जो आ जाती है रौनक


वो समझते है कि बीमार का हाल अच्छा है

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जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा,



कुरेदते हो जो अब राख, जुस्तजू क्या है ?





हथून कीय लकीरून पय मैट जा ऐ ग़ालिब,



नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते …




उनकी देखंय सी जो आ जाती है मुंह पर रौनक,



वह समझती हैं केह बीमार का हाल अच्छा है…!

Tip: To Copy Status, Tap & Hold On The Status


कितना खौफ होता है शाम के अंधेरूँ में,



पूँछ उन परिंदों से जिन के घर्र नहीं होते …





हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी के हर ख्वाहिश पे दम निकले



बहुत निकले मीरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

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रेख्ते के तुम्हें उस्ताद नहीं हो ग़ालिब



कहते हैं अगले ज़माने में कोई मीर भी था





फिर उसी बेवफा पे मरते हैं



फिर वही ज़िन्दगी हमारी है





मासूम मोहब्बत का बस इतना फ़साना है



कागज़ की हवेली है बारिश का ज़माना है




उस पर उतरने की उम्मीद बोहत कम है



कश्ती भी पुरानी है और तूफ़ान को भी आना है





यह इश्क़ नहीं आसान बस इतना समझ लीजिये



एक आग का दरया है और डूब कर जाना है

Tip: To Copy Status, Tap & Hold On The Status


कोई उम्मीद बर नहीं आती



कोई सूरत नज़र नहीं आती



आगे आती थी हाल-इ-दिल पे हंसी



अब किसी बात पर नहीं आती



क्यों न चीखूँ की याद करते हैं



मेरी आवाज़ गर नहीं आती.


हम वहाँ हैं जहां से हमको भी

कुछ हमारी खबर नहीं आती

mirza ghalib shayari in hindi 2 lines on love

तू तो वो जालिम है जो दिल में रह कर भी मेरा न बन सका , ग़ालिब

और दिल वो काफिर, जो मुझ में रह कर भी तेरा हो गया



हजारों ख्वाहिशें ऐसी की हर ख्वाहिश पे दम निकले

बहुत निकले मेरे अरमान , लेकिन फिर भी कम निकले




वो आये घर में हमारे , खुदा की कुदरत है

कभी हम उन्हें कभी अपने घर को देखते है




पीने दे शराब मस्जिद में बैठ के , ग़ालिब

या वो जगह बता जहाँ खुदा नहीं है




हुई मुद्दत के ग़ालिब मर गया, पर याद आती है

जो हर एक बात पे कहना की यूं होता तो क्या होता




इश्क़ पर जोर नहीं , यह तो वो आतिश है, ग़ालिब

के लगाये न लगे और बुझाए न बुझे


Tip: To Copy Status, Tap & Hold On The Status

आह को चाहिए एक उम्र असर होने तक

कौन जीता है तेरी जुलफ के सर होने तक




हमने माना की तग़ाफ़ुल न करेंगे लेकिन

खाक हो जायगे हम तुम्हे खबर होने तक




आशिक़ी सब्र -तलब और तमना बेताब

दिल का क्या रंग करू, खून-ऐ-जिगर होने तक




इश्क से तबियत ने जीस्त का मजा पाया,

दर्द की दवा पाई दर्द बे-दवा पाया।


Tip: To Copy Status, Tap & Hold On The Status

आता है दाग-ए-हसरत-ए-दिल का शुमार याद,

मुझसे मेरे गुनाह का हिसाब ऐ खुदा न माँग।




आया है बे-कसी-ए-इश्क पे रोना ग़ालिब,

किसके घर जायेगा सैलाब-ए-बला मेरे बाद।


mirza ghalib shayari in english 2 lines

तेरी वफ़ा से क्या हो तलाफी की दहर में,

तेरे सिवा भी हम पे बहुत से सितम हुए।




की हमसे वफ़ा तो गैर उसको जफा कहते हैं,

होती आई है की अच्छी को बुरी कहते हैं।




जी ढूंढ़ता है फिर वही फुर्सत के रात दिन,

बैठे रहे तसव्वुर-ए-जहान किये हुए।




कहते तो हो यूँ कहते, यूँ कहते जो यार आता,

सब कहने की बात है कुछ भी नहीं कहा जाता।




चांदनी रात के खामोश सितारों की क़सम,

दिल में अब तेरे सिवा कोई भी आबाद नहीं।




आशिकी सब्र तलब और तमन्ना बेताब,

दिल का क्या रंग करूँ खून-ए-जिगर होने तक।




मत पूँछ की क्या हाल हैं मेरा तेरे पीछे ,

तू देख की क्या रंग हैं तेरा मेरे आगे …


mirza ghalib shayari in hindi 4 lines

ऐ बुरे वक़्त ज़रा अदब से पेश आ ,

क्यूंकि वक़्त नहीं लगता वक़्त बदलने में …




ज़िन्दगी उसकी जिस की मौत पे ज़माना अफ़सोस करे ग़ालिब ,

यूँ तो हर शक्श आता हैं इस दुनिया में मरने कि लिए …




ज़ाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर ,

या वह जगह बता जहाँ खुदा नहीं ..




था ज़िन्दगी में मर्ग का खत्का लाग हुआ ,

उड़ने से पेश -तर भी मेरा रंग ज़र्द था .




क़ैद-ए-हयात-ओ-बंद-ए-ग़म,

अस्ल में दोनों एक हैंमौत से पहले आदमी ग़म से निजात पाए क्यूँ?


best shayari of mirza ghalib in hindi

इस सादगी पर कौन ना मर जाये

लड़ते है और हाथ में तलवार भी नहीं




उनके देखे जो आ जाती है रौनक

वो समझते है कि बीमार का हाल अच्छा है




जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा,

कुरेदते हो जो अब राख, जुस्तजू क्या है ?




हथून कीय लकीरून पय मैट जा ऐ ग़ालिब,

नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते …


Tip: To Copy Status, Tap & Hold On The Status

उनकी देखंय सी जो आ जाती है मुंह पर रौनक,

वह समझती हैं केह बीमार का हाल अच्छा है…!!!




दिल सी तेरी निगाह जिगर तक उतर गई,

2नो को एक अड्डा में रज़्ज़ा मांड क्र गए …!!!




कितना खौफ होता है शाम के अंधेरूँ में,

पूँछ उन परिंदों से जिन के घर्र नहीं होते …




हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी के हर ख्वाहिश पे दम निकले

बहुत निकले मीरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले




रेख्ते के तुम्हें उस्ताद नहीं हो ग़ालिब

कहते हैं अगले ज़माने में कोई मीर भी था




फिर उसी बेवफा पे मरते हैं

फिर वही ज़िन्दगी हमारी है




मासूम मोहब्बत का बस इतना फ़साना है

कागज़ की हवेली है बारिश का ज़माना है




उस पर उतरने की उम्मीद बोहत कम है

कश्ती भी पुरानी है और तूफ़ान को भी आना है



यह इश्क़ नहीं आसान बस इतना समझ लीजिये

एक आग का दरया है और डूब कर जाना है






... Thank You ...
                                                                                                                                                                                                                                                                      

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