YE JO TERI ADAT HAI YAAR BADALNE KI KAMBAKHT HAME NAHI AATI | UMESH RAJPUT | POETRY - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

YE JO TERI ADAT HAI YAAR BADALNE KI KAMBAKHT HAME NAHI AATI | UMESH RAJPUT | POETRY


यह जो तेरी आदत हैं यार बदल जाने की कमबख्त हमे नहीं आती 

YE JO TERI ADAT HAI YAAR BADALNE KI KAMBAKHT HAME NAHI AATI | UMESH RAJPUT | POETRY
YE JO TERI ADAT HAI YAAR BADALNE KI KAMBAKHT HAME NAHI AATI

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हर पल सोचता हूँ तुझे यह वो ख्याल

जो मेरे जहन से जाता नहीं

न सांसे मेरे बगैर पर तेरी तस्वीर देखे बिना मुझे 

...

नींद नहीं आती कहा मालूम था इतना दुश्वार होगा 

जीना बगैर तेरे यह जो तेरी आदत हैं यार बदल जाने की 

कमबख्त हमे नहीं आती


...

पर मोहब्बत आज भी हैं पहली दफा वालीं

तेरा चेहरा तक मुझे भुलाया जाता नहीं

पर शिकायत जरूर रहतीं हैं इन आखों में

...

तुम अकेली नहीं हों इस दुनियां में जो ओर कोई भाता नहीं

तुम्हे मिला ओर कोई मुबारक हों तुम्हें

हमे किसी ओर कीं जरूरत नहीं क्यूँ कि यह आदत हैं 

तुम्हारी यार बदलने की जो हमे आतीं नहीं

...

बहुत अच्छा खेलती हो दिल से पेशेवर लगतीं हो

औरों के साथ खेला अच्छी बात थी उन्हें भी 

तुमसे मोहब्बत न थीं ओर अगर हमे थीं तो तुम्हें  

कदर कहा थी तुमने तो वहीं किया जो मर्ज़ी थी तुम्हारी

...

ओर मेरे इमोशंस के साथ खेलना भी एक अदा हैं 

तुम्हारी ओर ज़मीर बेचना तुम्हारे खानदान मे होता है

...

हमारे यहाँ ऐसा होता नहीं

यह आदत तुम लोगों की हैं यार 

बदलने की जो हमे आतीं नहीं

...

हर बार कुछ नया पता चलता है

वो जो तूने मेरे लिए कभीं किया ही नहीं

किसी ओर के लिए किया हैं

जो गुस्सा हैं दिखाये

...

केसे तेरी तरह ख़ुश नजर आये

केसे और मोहब्बत किसी ओर

कैसी बात करती हो

तुम रूह तक उतर चुकी

...

जिंदा रहकर तुम्हें भुलाए कैसे तुम्हें ही चाहने मे 

निकलेगी पूरी जिंदगी यह आदत है तुम्हारी यार 

बदलने की जो हमे आती नहीं

...

तुम्हारी ब्लैक लिस्ट में रहते हैं फिर भी तुम्हें दिल में रखते हैं

पागलपन ही तो हैं जो बेवफ़ा,बेशरम, बेयहा से  

बेपनाह मोहब्बत करते हैं

...

पर तुम जैसे खुद गर्ज  लोग कहां समझते हैं

अरे जिन्होंने बदले हों यार कैलेंडर की तारीख 

की तरह उन्हें आज भी नोटों

की खुशबु से प्यार हैं

...

वो प्यार की खुशबु को महसूस ही कहा करते हैं 

मेरी सांसो को भी आदतें लगी तेरे जिस्म की कोई 

...

ओर मेरे करीब आए यह भी गबारा नहीं

क्युकी यह आदत तुम्हारी हैं यार बदलने की 

जो हमे आतीं नहीं

...

कोशिश की हैं मेने किसी ओर को चाहने की दिल से

तुम्हें भुलाने की लेकिन जब वही बातें 

...

उससे दोहराता हू तो हार जाता हूँ

जानता हूं तुम्हें नहीं होता होगा महसूस

क्यूंकि तुम्हारी आदत हैं यार बदलने की

 जो हमें आती नहीं

...

चुभने लगा था ना तुझे मेरा मिठी कहना

वो दिन भुलाये नहीं भूलता जब तूने कहा था

कौन मिठी किसकी मिठी क्यूँ कहते हो

...

मुझे मिठी क्यू तू आखिरी बार मेरे सीने से लगकर रोई थी

जाते वक्त उसने भी चूमा था मेरा माथा वो क्या था तेरा ड्रामा

वैसे एक बात कहू ये मोहब्बत तेरी ही थी

...

मैं कभी लायक ही नहीं था तेरे तूने ही सिखाया

प्यार करना किया भी ऐसे की 

मोहब्बत अब किसी के लिए बची ही नहीं

हा यार मिठी यह आदत तेरी हैं यार 

बदल जाने की कमबख्त हमे नहीं आती






... Thank You ...




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