TERE HONE SE | MRITYUNJAY | POETRY - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

TERE HONE SE | MRITYUNJAY | POETRY

तेरे होने से :

TERE HONE SE | MRITYUNJAY | POETRY
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शायरी - मैं हूँ एक मुसाफ़िर मेरी है लड़ाई



मैं लड़ने के ख़ातिर सफ़र कर रहा हूँ

अब लड़ाई मेरी हैं

इस नफ़रतों के बाजार से

तो नफरत ए हैं हमेशा ही मुझसे नाकाम दुआओं का

ऐसा सिकंदर क़ाफ़िला हूँ

तेरे होने से:-----


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ये महफ़िल सुनसान हैं अब जो आवाद थी तेरे होने से

अब केवल सांसे चलतीं हैं इनमें जान थी तेरे होने से

हम तन्हा ही मुस्काते थे ग़म आने से कतराते थे

अब ग़म के भी भाग्य खुले जो बर्बाद थे तेरे होने से

ज़र्रे का होंसला देखों तो हम ख़ुदा को आँख दिखाते थे

आसुओं की बरसात नहीं जो अनजान थी 

तेरे होंने से...

...

एक चीज़ क़ीमती क्या पायी हम दुनिया में इतराते थे

ओर ख्वाबों कीं नींद भी टूटी तो जो नाकाम थी तेरे होंने से

एक दुःख का समंदर तू कश्ती दिल बिन पतवार के बैठा था

आवाज़ न दे वो डूब गया जो तेरा था 

तेरे होने से...

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अब ज़हर ज़िंदगी शर्त मगर इसको घुट घुट कर पीना हैं

विष पीकर हम भी बन जाते महादेव भी तेरे होने से

महादेव भी 

तेरे होने से...




... Thank You ...






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