TUJHE PANE KI ZID MEIN KHUD KO KHOTI JA RAHI HUN | GOONJ CHAND | POETRY - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

TUJHE PANE KI ZID MEIN KHUD KO KHOTI JA RAHI HUN | GOONJ CHAND | POETRY

TUJHE PANE KI ZID MEIN KHUD KO KHOTI JA RAHI HUN | GOONJ CHAND | POETRY
TUJHE PANE KI ZID MEIN KHUD KO KHOTI JA RAHI HUN 

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खुद के बनाये रिश्तो में उलझती जा रही हु 

एक तुझे पाने की ज़िद में खुद को खोती जा रही हूँ

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तेरे उन बेजान से खतो में तेरे अलफ़ाज़ आज भी ज़िंदा है मेरे पास 

पैर खुद में जान होते हुए भी बेजान सी होती जा रही हु 

एक तुझे पाने की ज़िद में खुद को खोती जा रही हूँ

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घर में बिखरी चीज़े पसंद नहीं है मुझे इसलिए 

उन्हें समेटने की चाह में खुद की ही ज़िन्दगी को बिखेरती जा रही हु 

एक एक तुझे पाने की ज़िद में खुद को खोती जा रही हूँ

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में तोह वो चिराग थी जिसे बारिश तक का खौफ न था 

पैर अब तो हवा के हलके से झोके से दरी जा रही हु में 

एक तुझे पाने की ज़िद में खुद को खोती जा रही हूँ

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पहले तोह हर छोटी छोटी बातो पर आंसू बहा दिया करती थी 

पर अब तोह अपने आंसुओ को अपनी हसीं से छुपाये जा रही हु 

एक तुझे पाने की ज़िद में खुद को खोती जा रही हूँ

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खुद के बनाये रिश्तो में उलझती जा रही हु 

एक तुझे पाने की ज़िद में खुद को खोती जा रही हूँ

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ज़िन्दगी के हर मोड़ पर साथ निभाने का वादा तो हम दोनों का था न

पर को आज में ये सरे वादे अकेले ही निभाए जा रही हु 

एक तुझे पाने की ज़िद में खुद को खोती जा रही हूँ

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खुद के बनाये रिश्तो में उलझती जा रही हु 

एक तुझे पाने की ज़िद में खुद को खोती जा रही हूँ





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