Evergreen Shayaris By Wasim Barelvi - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Evergreen Shayaris By Wasim Barelvi

Evergreen Shayaris By Wasim Barelvi

Shayaris By Wasim Barelvi
Evergreen Shayaris By Wasim Barelvi 


हद से बड़ी उड़ान की ख्वाहिश तो यूँ लगा
जैसे कोई परों को कतरता चला गया 
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मंज़िल समझ के बैठ गये जिनको चंद लोग
मैं एैसे रास्तों से गुज़रता चला गया 



फ़ैसला लिखा हुआ रखा है पहले से खिलाफ़ 
आप क्या खाक अदालत में सफाई देंगे 
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मुझे ये खौफ दे माली की मुझी पर नज़र तेरी 
बस इतना नहीं काफी की सजदा कर लिया मैंने 






सभी को छोड़ के खुद पर भरोसा कर लिया मैंने
वह जो मुझमें मरने को था जिंदा कर लिया मैंने 
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मुझे उस पार उतर जाने की जल्दी ही कुछ ऐसी थी की

जो कश्ती मिली उस पर भरोसा कर लिया मैंने 






ये कैसा ख्वाब है आँखों का हिस्सा क्यों नहीं होता
दिये हम भी जलाते है उजाला क्यूं नहीं होता 
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मुझे सबसे अलग रखना ही उसका शौक था वरना

वो दुनिया भर का हो सकता था मेरा क्यूं नहीं होता 

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हम ही सोचे ज़माने की हम ही माने ज़माने की

हमारे साथ कुछ देर जमाना क्यूँ नहीं होता 






ज़रा सा क़तरा कहीं आज गर उभरता है
समन्दरों ही के लहजे में बात करता है 
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ख़ुली छतों के दिये कब के बुझ गये होते

कोई तो है जो हवाओं के पर कतरता है 

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शराफ़तों की यहाँ कोई अहमियत ही नहीं

किसी का कुछ बिगाड़ो तो कौन डरता है 







दुनिया की हर जंग वही लड़ जाता है
जिसको अपने आप से लड़ना आता है 
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पर्दा जब गिरने के करीब जाता है

तब जाकर कुछ खेल समझ में  आता है 

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तुम क्या सोच रहे हो मेरे बारे में

चेहरे से ही अंदाजा हो जाता है 







बड़ी तो है गली कूचों की रौनक
मगर इंसान तन्हा हो गया है 
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जरा अपनायत से उसने देखा

तो क्या खुद पर भरोसा हो गया है 







                                                                  

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