Evergreen Shayaris By Nida Fazil - Flash Jokes - Latest shayari and funny jokes

Evergreen Shayaris By Nida Fazil

Evergreen Shayaris By Nida Fazil


Shayaris By Nida Fazil
Evergreen Shayaris By Nida Fazil



"अपने लहजे की हिफ़ाज़त कीजिए

शेर हो जाते हैं ना-मालूम भी"




"अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं

रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं"




"अब किसी से भी शिकायत न रही

जाने किस किस से गिला था पहले

अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला

हम ने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला"




"इतना सच बोल कि होंटों का तबस्सुम न बुझे

रौशनी ख़त्म न कर आगे अँधेरा होगा"




"इस अँधेरे में तो ठोकर ही उजाला देगी

रात जंगल में कोई शम्अ जलाने से रही"




"उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा

वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा"





"उस को रुख़्सत तो किया था मुझे मालूम न था

सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला"




"एक बे-चेहरा सी उम्मीद है चेहरा चेहरा

जिस तरफ़ देखिए आने को है आने वाला"




"एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक

जिस को भी पास से देखोगे अकेला होगा"





"कुछ तबीअ'त ही मिली थी ऐसी चैन से जीने की सूरत न हुई

जिस को चाहा उसे अपना न सके जो मिला उस से मोहब्बत न हुई"





"बहुत मुश्किल है बंजारा-मिज़ाजीस
लीक़ा चाहिए आवारगी में"




"ख़ुदा के हाथ में मत सौंप सारे कामों को
बदलते वक़्त पे कुछ अपना इख़्तियार भी रख"




"बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है"




"अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला
हम ने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला"




"बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता
जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता"




"ख़ुश-हाल घर शरीफ़ तबीअत सभी का दोस्त
वो शख़्स था ज़ियादा मगर आदमी था कम"




"बृन्दाबन के कृष्ण कन्हय्या अल्लाह हू
बंसी राधा गीता गैय्या अल्लाह हू"




"रिश्तों का ए’तिबार वफ़ाओं का इंतिज़ार
हम भी चराग़ ले के हवाओं में आए हैं"




"अब किसी से भी शिकायत न रही
जाने किस किस से गिला था पहले"




"किस से पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ कई बरसों से
हर जगह ढूँढता फिरता है मुझे घर मेरा"




"धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो"




"अपने लहजे की हिफ़ाज़त कीजिए
शेर हो जाते हैं ना-मालूम भी"




"दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती
ख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती"




"किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो"




"दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है"




"अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं"




"दुनिया न जीत पाओ तो हारो न आप को
थोड़ी बहुत तो ज़ेहन में नाराज़गी रहे"



"कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है
सब ने इंसान न बनने की क़सम खाई है"




"दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे 
रिश्तादिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए"










                                                                  

Post a Comment

0 Comments